तलाक़ पर हस्ताक्षर किए, अब वह घुटने टेककर भीख माँग रहा है

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अध्याय 95

कार के अंदर की हवा धीरे-धीरे बर्फ़-सी ठंडी होती जा रही थी।

सड़क किनारे लगे स्ट्रीटलाइट्स की रोशनी एक-एक करके झपटती हुई जेम्स के चेहरे पर पड़ रही थी। बदलती रोशनी और साये के बीच मैंने उसके भींचे हुए होंठ और जबड़े की कसी हुई रेखा देखी।

“मैं पहले ही बता चुका हूँ।” वह हर शब्द को धीरे-धीरे बोल रहा था; उ...

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